In Natures Lap

The poetry of nature is most alive! Explore the love and colors of life with this poem…Because the good things can never be bought, they are all free!!

Author: Prabha Jain ‘Shree’

बाल गीत 

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हुई भोर, सूरज निकला

 चिड़ियों ने भी आंखें खोली, 

कलियों ने पत्ता हटा झाँका 

पत्ते भी हिल-हिल खुश हुए। 

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दूर कहीं मंदिर घंटी बोली

 चिड़ियाँ चीं-चीं, चे-चे कर,

  प्रार्थना प्रभु की जैसे कर रही

 सूर्य किरण भर रही जोश। 

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चुन्नू -मुन्नू दौड़  कर आए

 तितली का पीछा कर रहे, 

तितली बैठ चुपके से छिपती 

दोनों उसे डाल-डाल ढूढ़ रहे। 

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अब देखो वो निकली तितली

 नीचे से ऊँचे उड़ी तितली, 

कितने प्यारे रंग हैं उसके

 चुन्नू मुझ से पूछ रहा सवाल। 

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माँ, नीला आकाश, हरी धरती 

लाल-नीले-पीले-जामुनी फूल

आकाश में सात रंग,इंद्र धनुष

 माँ, कौन हैं  ऊपर बैठा,

  कौन चित्रकार ने भरे यह रंग। 

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बाल सुलभ प्रश्नों के उत्तर 

मैं बाल भाषा में दे रही,

बेटा वो हैं सर्वगुण सम्पन्न 

दाता हैं वो सृजन कर्ता। 

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हमारे हाथ फैले हुए

 हम है सिर्फ लेने वाले,

 प्रकृति को संभाल ना पाते 

दस -दस पौधें लगाओ। 

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पानी- बिजली तुम बचाओ 

पक्षी हित दाना पानी रखो,

 जीओ और जीने दो सबको 

अपने से अच्छा कर जाओ।

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About the author

Pooja Jain

A passionate doctor, a writer, blogger, avid reader, music lover, painter, coffee freak and a traveller!!….

I’m simply happy being me….I believe every single day holds the potential of beauty……A person who tries to look into positive in almost every situation...In short I'm just myself inspiring others in my journey!!

'Spread your wings,it's time to fly...Make the Leap, Own the sky!!!'

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